I believe in the imagination. What I cannot see is infinitely more important than what I can see.

Wednesday, October 3, 2007

चाँद , तारे और दोस्ती..


जब देखों आसमा दिखेंगे चाँद तारे साथ
कितनी प्यारी दोस्ती है इनकी, कि
होता है हमेशा हांथो में हाथ
मगर यदि गौर से देखें तो
सिर्फ दिखते ही ये तारे साथ हैं
पर वास्तव में हैं बहुत दूर चाँद से
हमे लगता हैं कि कितना खुश है चाँद
इतने सारे तारो के साथ
पर वो सिर्फ दूर से दिखते है पास
लेकिन कभी पास नहीं थे, न होंगे
शायद, इसी तरह ज़िन्दगी मेरी भी है
मिलती हूँ अनेको से
बातें भी किया करती हूँ न जाने कितनों से
सभी को लगता होगा, कि कितने सारे दोस्त हैं
परंतु मैं भी उसी चाँद की तरह हूँ
जो दूर से ढ़ेर सारे तारों के साथ खुश दिखता है
पर यदि पास जा कर देखेंगे तो मिलेगा
बिल्कुल अकेला, सबके सामने मुस्कुराता
परंतु अन्दर ही अन्दर रोता हुआ
इसीलिये तो चाँद कि धरती रेगिस्तान है
और मेरा दिल वीरान है पर उम्मीद है
कि कभी न कभी जीवन होगा चाँद पर
जैसे मुझे उम्मीद है कि कोई मिलेगा कभी न कभी
इस जीवन में , जो होगा दिल के पास
भले देखने में लगे दूर....

(साहित्यिका)

1 comment:

chirag said...

nice one
thinking poems
tells that we had lot of frnds in this world but still we are alone

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