I believe in the imagination. What I cannot see is infinitely more important than what I can see.

Thursday, March 19, 2009

तुम्हारे मन में भाव ऐसे
निश्छल अविचल छाँव जैसे
इन भावों में प्रेम छिपा है
दूजों कई दर्द का वेग छिपा है।
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रहस्यमयी धरा सी निश्चल
विस्तार मयी गगन सी चंचल
होंठों पर खेलती यह मुस्कान
सांत्वना देती है पल पल।

6 comments:

bhootnath( भूतनाथ) said...

हम्म्म्म्म्म्म बस ठीक-सी पंक्तियाँ लगी....!!

chirag said...

nice one

अनिल कान्त : said...

ye bhi khoob rahi

दिगम्बर नासवा said...

सुन्दर पंक्तियाँ हैं.........
अच्छी भावः, अच्छी अभिव्यक्ति
कुछ लाइनों में लम्बी बात

शिवराज गूजर. said...

मन को छू लेने वाली रचना. बधाई.
वक़्त मिले तो मेरे ब्लॉग
meridayari.blogspot.com
पर भी आयें

rahul said...

nice lines!!

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