I believe in the imagination. What I cannot see is infinitely more important than what I can see.

Monday, February 23, 2009

भाव


छोड़ दिया लिखना की अब तो शब्द ही नही आते

दिल हो गया पत्थर की अब तो भाव ही नही आते

पर कहती है दुनिया कि पत्थर को भी तराशा जा सकता है

और हो जो मन में भाव तो पत्थर में भी देवता उतारा जा सकता है..

12 comments:

Poonam Agrawal said...

Very nice....original....

vandana said...

bahut hi badhiya bhav.

jack said...

hey that was nice, you write really well
I am not soo good at hindi, i am sure your posts can surely help he improve :)

अमिताभ श्रीवास्तव said...

wah, aapki panktiyo me naa jaane esa kyaa he jo vazan rakhta he..aour usase hota ye he ki bahut se arth nikalne lagte he, yahi chand panktiyo ki sarthakta he..
achcha likhti he aap, aapke blog par aanaa achcha lagne laga he..

SAHITYIKA said...

dhanyawad..
ji haa . ye maine hi likhi hai.. :)

bhootnath( भूतनाथ) said...

ऐसा भी हो जाता है जब कि शब्द नहीं आते.....
आ भी जाए तो फिर आकर कहीं नहीं जाते.....
किसने समझा है इन शब्दों के मतलब को....
किसी की समझ में ये मतलब ही नहीं आते.....
शब्दों की तलाश में हम अकसर खो ही जाते हैं
और लौट कर ये रस्ते फिर नज़र भी नहीं आते
मन के तूफानों में अक्सर ही हम डूब जाते हैं....
और फिर यही शब्द तो हमें रास्ता हैं दिखाते.....
इक ज़रा प्यार से जब कभी इनको बोला करो....
बड़े-बड़े पत्थर भी फिर कोमल से फूल बन जाते
कभी तो अपने मन को मसोस कर धर देते हैं हम
और कभी आसमां की जद में उड़ने को चले जाते
हमसे यूँ बेमतलब ही उखड़े-उखड़े तुम रहा ना करो
हमसे भी तुम्हारे नखरे "गाफिल" सहे नहीं जाते....

SAHITYIKA said...

dhanyawad bhootnath ji..
हमसे यूँ बेमतलब ही उखड़े-उखड़े तुम रहा ना करो
हमसे भी तुम्हारे नखरे "गाफिल" सहे नहीं जाते....

in panktiyon ka matlab kanhi hmse to nahi??

mayz said...

ahhhhh such beautiful lines...esp
"pathar ko bhi tarasha jaa sakta hai"
loved it completely!!!

blogrollin ya...i need to come here n read stuff like this more often

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाहवा... अच्छी रचना..

Baadal102 said...

bahut khoob
mari janib se daad kabool farmayen

Sneha said...

Ati sunder.:)

Rajat Narula said...

बहुत उत्तम रचना है !

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