I believe in the imagination. What I cannot see is infinitely more important than what I can see.

Tuesday, May 5, 2009

अनजान मुलाकात


19 मार्च, पुणे स्टेशन
मैं प्लेटफोर्म पर खड़ी आरक्षण चार्ट में अपनी बोगी व सीट नम्बर ढूंढ रही थी। बहुत ढूंडने पर जब नही मिला तो मैंने घर फ़ोन किया और अपनी बहन से नेट पर देख कर बता देने को कहा। उसने बताया S3 में २१ सीट नम्बर है। ट्रेन सामने ही खड़ी थी। मैंने काफ़ी और स्नेक्स ख़रीदे और ट्रेन में चढ़ गई। डिब्बा खाली थी और ट्रेन चलने में थोडी देर थी। मैंने अपनी सीट पर सामान रखा और थोड़ा आराम करके खाना खाया। तभी एक व्यक्ति जिसकी उम्र करीबन 30 वर्ष के आसपास थी और मेरी सामने वाली सीट पर बैठ गया। थोडी देर बाद उसने पूछा " आप कहा जा रही हैं? " मैंने कहा "भोपाल" । औपचारिकतावश मैंने भी पूछ लिया तो उसने बताया की वह शहडोल जा रहा है। फिर कुछ और बातें करने के बाद उसने कहा " यदि आप बुरा ना माने तो एक बात कहूँ , ट्रेन में इतना सोना पहन कर नही चलना चाहिए। " उसका इशारा मेरी अंगूठियों की तरफ़ था। मैंने एक ही हाथ में ५ अंगूठियाँ पहन राखी थी। जिसमे से 4 सोने की थीं। मैं उसकी बात सुन कर बोल पड़ी " सब सोने की थोड़े ही हैं। "

इतनी देर में डिब्बे में और भी लोग आ चुके थे। तभी एक लड़का, जिसकी उम्र करीबन 25-26 के आसपास होगी, फ़ोन पर बात करता हुआ आया। कद करीबन 5'10" था और रंग गेंहुआ था। उसके पास एक बैग था । वह side lower birth पर आ कर बैठ गया। वह फोन पर बात कर रहा था " क्या बताऊँ स्टेशन पर कितनी भीड़ थी , आगे कम से कम 50-60 लोग और पीछे भी इतने ही। चलना भी पड़ रहा था। बड़ी मुश्किल से डिब्बे में पंहुचा हूँ। और अब एक सीट पर बैठ गया हूँ."
कुछ देर बाद ट्रेन चलने लगी और मैंने अपने साथ वाले एक व्यक्ति से बात करके अपनी सीट बदल कर ऊपर वाली बर्थ ले ली. जब मैं ऊपर जा रही थी तब मेरा ध्यान फिर से उसकी बातों पर चला गया. वो कह रहा था " कोई जरुरत नही है लखनऊ आने की. मैं आ जाऊंगा या फिर हम कही और मिल लेंगे."
"लखनऊ" ये शब्द सुनाने के बाद मैं आगे कुछ नहीं सुन पाई. किसी की याद ने आकर अचानक दस्तक दी और मन वंहा खो गया. फिर ना ट्रेन का शोर सुनाई पढ़ा ना ही लोगो की बातें ।


to be continued........


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8 comments:

chirag said...

ek acchhi pyari romantic kahani shuru hone vali hain

Sneha said...

Waiting for the next part.:)

khamma gani said...

accha likhati ho muje intzar hai next part ka

भूतनाथ said...

to be continued........is intervel ne man men dhukdhuki badha dee....!!

Sumit said...

shayad yakeen na kare, par pune station pe kai vakiye hote hue dekhe hai... pata nahi yeh us shehar ki khasiyat hai ya us station ki, ya fir shayad is baat ki ke yuvak peedi ki sankhya waha adhik hai (aap mumbai jaaye to utne hi milenge, par bheed mein unki sankhya zyaada nahi hogi) aur yuvak peedi ko romanch ka shauk vaise bhi rehta hai...
ya fir shayad kahaniya kisi bhi mod se shuru ho sakti hai!! :)

SAHITYIKA said...

@ sumit
haa wo to hai hi.. lekin jab aap puna ki baat kar rahe hai.. thn it becomes necessary for me to tell u that.. b/c of some reasons i hav changed the name of the city.. bt yes of course it was metro city.. city of youngster.. :)

Sumit said...

ab iske aage na kahiye!! shayad hum samajh gaye hai ki woh shehar kaunsi hai.. :)

Tan said...

kal main pura nahi parh paya... aaj main bahot dukhi hun... nahi parh paunga... kal parhunga... ya phir shaamko.. bahot kuch hai parhne ke liye... zaroor parhunga...

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